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Showing posts from December, 2024

*वसई तालुका है इसे जिल्हा किसने घोषित किया ?*

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       वसई तालुका है इसे जिल्हा किसने घोषित किया ? प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी सहित अन्य कई पार्टियों ने अपने पदाधिकारियों को पद देते समय इस बात का ख्याल रखें कि महाराष्ट्र राज्य में सन् 2024 तक वसई जिल्हा नहीं बना हुआ है वसई मात्र एक तालुका है‌ किन्तु तालुका अध्यक्ष लिखने में नेताओं को शायद शर्म आती है इसलिए नेताओं ने स्वघोषित जिल्हा वसई तालुका बना दिया है जबकि शासन परिपत्रक में इसका कोई उल्लेख नहीं है कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बात पर विरोध जताया है और माननीय मुख्यमंत्री महाराष्ट्र से तथा माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार से इन लोगों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए निवेदन भी किया है | स्वघोषित पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने वसई-विरार शहर महानगरपालिका में तथा अन्य कार्यालयों में R.T.I. कार्यकर्ता बनकर अधिकारियों के समक्ष काफी उहापोह मचाया व धड़ल्ले के साथ अपने आप को वसई-विरार शहर जिल्हा अध्यक्ष लिखकर सबूतों के साथ पेश किया हुआ है जबकि महाराष्ट्र की धरती पर सन् 2024 तक वसई मात्र तालुका है वसई जिल्हा अभी तक नहीं बना हुआ है | वसई-विरार शहर जिल्हा लिखने...

*Breaking Vasai Virar: वसई विरार महानगरपालिका चुनाव नहीं होगा*

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   **Breaking News Vasai Virar: वसई विरार महानगरपालिका चुनाव नहीं होगा. लाडली बहन योजना बीजेपी फायदा लेना चाहती है .वसई विरार महानगरपालिका इस साल चुनाव  जल्दी-जल्दी होना चाहिए  . BVA को हराना चाहती है 

*हॉकी के 'जादूगर' मेजर ध्यानचंद की जिंदगी से जुड़े रोचक*

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   हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद सिंह को कौन नहीं जानता है। उनका जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था। वह भारतीय फील्ड हॉकी के भूतपूर्व खिलाडी व कप्तान थे उन्हें भारत एवं विश्व हॉकी के क्षेत्र में सबसे बेहतरीन खिलाडियों में शुमार किया जाता है। वे तीन बार ओलम्पिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे हैं। इनमे से 1928 का एम्सटर्डम ओलोम्पिक, 1932 का लॉस एंजेल्स ओलम्पिक और 1936 का बर्लिन ओलम्पिक शामिल है। 3 दिसंबर 1979 को जब उन्होंने दुनिया से विदा ली तो उनके पार्थिव शरीर पर दो हॉकी स्टिक क्रॉस बनाकर रखी गई। ध्यानचंद ने मैदान पर जो ‘जादू’ दिखाए, वे इतिहास में दर्ज है। ध्यानचंद की जिंदगी के कुछ रोचक किस्से:- 1) 16 साल की उम्र में सेना में भर्ती ध्यानचंद के पिता सेना में थे, जिस वजह से बार-बार ट्रांसफर के कारण वह छठी क्लास तक ही पढ़ पाए। वर्ष 1922 में वह 16 की उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए। सेना में लोगों को खेलते देख उनके मन में भी खेलने की ख्वाहिश जगी। सुबेदार बाले तिवारी ने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाईं और फिर एक दिन वह देश के बेस्ट हॉकी खिलाड़ी बन गए। 2)...

भाजपा नालासोपारा आमदार राजन नाईक दुबे इस्टेट मार्केट अवैध जल्द से जल्द करवाई तोड़ा जाए

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   Breaking News Nalasopara: भाजपा नालासोपारा आमदार राजन नाईक  दुबे इस्टेट  अवैध मार्केट है . बहुत ज्यादा ट्रैफिक होता है. भाजपा नालासोपारा आमदार राजन नाईक  दुबे इस्टेट मार्केट अवैध जल्द से जल्द करवाई तोड़ा जाए*